विषय-सूची
- Crypto vs Share Market: एक अंतहीन बहस और आपकी सबसे बड़ी ‘गलती’।
- कहाँ बनेगा पैसा जल्दी? वोलैटिलिटी का असली सच।
- सुरक्षा और रिस्क: क्या आपका पैसा वाकई सेफ है?
- भारत में लीगलिटी और टैक्स: 30% का ‘झटका’ और कानून।
- शुरुआत कैसे करें? एक ‘Best’ पोर्टफोलियो बनाने की रणनीति।
- लेखक परिचय।
Crypto vs Share Market: यदि आप अभी भी पुराने तरीके से निवेश कर रहे हैं और शेयर बाज़ार को ही एकमात्र विकल्प मानते हैं, तो शायद आप अपनी आर्थिक आज़ादी की रेस में पीछे छूटने के शौकीन हैं। क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो यह जानना ही नहीं चाहते कि 2026 तक कौन सा एसेट क्लास दुनिया पर राज करेगा? अगर हाँ, तो यह जानकारी आपके लिए खतरनाक है, क्योंकि यह आपकी सोचने की दिशा बदल देगी!
1. कहाँ बढ़ता है पैसा तेज़ी से?
जब हम Crypto vs Share Market की तुलना करते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल ‘रिटर्न’ का होता है। शेयर बाज़ार एक मैच्योर मार्केट है जहाँ सालाना 12-15% का रिटर्न अच्छा माना जाता है। वहीं, क्रिप्टो बाज़ार अपनी अत्यधिक वोलैटिलिटी (Volatility) के लिए जाना जाता है। यहाँ पैसा रातों-रात दोगुना भी हो सकता है और आधा भी। क्रिप्टो विशेषज्ञ के अनुसार, क्रिप्टो उन लोगों के लिए Best है जिनमें रिस्क लेने की क्षमता है और जो नई तकनीक (जैसे ब्लॉकचेन) पर भरोसा करते हैं।
2. सुरक्षा और हैकिंग का डर: क्या है हकीकत?
अक्सर लोग सोचते हैं कि क्रिप्टो हैक हो सकता है। सच तो यह है कि ब्लॉकचेन तकनीक को हैक करना लगभग नामुमकिन है। Crypto vs Share Market में मुख्य अंतर यह है कि शेयर बाज़ार को सेबी (SEBI) रेगुलेट करता है, जबकि क्रिप्टो अभी भी एक डीसेंट्रलाइज्ड (Decentralized) व्यवस्था है। यहाँ स्कैम उन लोगों के साथ होता है जो अपना पासवर्ड या ‘सीड फ्रेज़’ (Seed Phrase) किसी को दे देते हैं। शेयर मार्केट में कंपनियां डूब सकती हैं, लेकिन बिटकॉइन जैसी एसेट किसी कंपनी के भरोसे नहीं चलती।
3. भारत में लीगलिटी: क्या क्रिप्टो ‘सट्टा’ है?
भारत में Crypto vs Share Market को लेकर काफी भ्रम है। कई लोग आज भी इसे सट्टा बाजार मानते हैं। एक्सपर्ट स्पष्ट करते हैं कि क्रिप्टो भारत में ‘इल्लीगल’ (Illegal) नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह रेगुलेटेड भी नहीं है। सरकार ने इस पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस (TDS) लगाकर यह संकेत दिया है कि वे इसे एक एसेट के रूप में पहचान रहे हैं। शेयर बाजार में टैक्स के नियम अलग हैं और काफी पुराने हैं, जो निवेशकों के लिए अधिक स्पष्टता प्रदान करते हैं।
4. डॉलर की मोनोपोली और बिटकॉइन का भविष्य
बिटकॉइन को ‘डिजिटल गोल्ड’ कहा जाता है क्योंकि इसे कोई भी सरकार कंट्रोल नहीं कर सकती। Crypto vs Share Market की बहस में यह एक बड़ा पॉइंट है। जहाँ शेयर मार्केट किसी देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है, वहीं क्रिप्टो एक वैश्विक एसेट है। यदि आप केवल अपने देश की बाउंड्री में रहकर निवेश करना चाहते हैं, तो शायद आप वैश्विक वेल्थ क्रिएशन का मौका खो रहे हैं।
5. आपके लिए ‘Best’ क्या है?
अगर आप एक सुरक्षित और स्थिर ग्रोथ चाहते हैं, तो शेयर मार्केट आपके लिए Best है। लेकिन अगर आप तकनीकी क्रांति का हिस्सा बनना चाहते हैं और हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड के लिए तैयार हैं, तो क्रिप्टो में छोटा हिस्सा डालना समझदारी हो सकती है। यश गुप्ता की सलाह है कि कभी भी अपनी पूरी पूंजी एक जगह न लगाएं।
| Year (Dec to Dec) | Nifty 50 Return (Approx.) | Bitcoin (BTC) Return (Approx.) |
| 2016 | 3.01% | 125% |
| 2017 | 28.6% | 1,318% |
| 2018 | 3.15% | -73% (Bear Market) |
| 2019 | 12.02% | 92% |
| 2020 | 14.9% | 302% |
| 2021 | 24.1% | 59.8% |
| 2022 | 4.3% | -64% (Bear Market) |
| 2023 | 20.0% | 155% |
| 2024 | 18.5% | 148% |
| 2025 | 15.2% | 112% |
| Total 10-Yr CAGR | ~14.5% | ~85% |
Crypto vs Share Market में से किसी एक को चुनना आपकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। जानकारी के बिना कहीं भी पैसा डालना जुआ है। क्या आप एक जागरूक निवेशक बनेंगे या भीड़ का हिस्सा बनकर अपना नुकसान कराएंगे?
